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नियमित जांच से ही रुक सकती है हाई रिस्क प्रेगनेंसी
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नियमित जांच से ही रुक सकती है हाई रिस्क प्रेगनेंसी

महिला ही परिवार की धुरी होती है। गर्भावस्था के दौरान महिला की विशेष देखरेख की जरूरत होती है ताकि जच्चा- बच्चा दोनों स्वस्थ रहें। राज्यमंत्री स्वाती सिंह ने रविवार को गोमती नगर स्थित एक होटल में इंफर्टिलिटी रिसर्च फाउन्डेशन की ओर से हाई रिस्क प्रेगनेंसी पर आयोजित कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान यह बात कही।

 उन्होंने गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच कराने की बात कही। जिससे कोई प्रेगनेंसी के दौरान कोई परेशानी न आए। डॉ राजुल त्यागी ने बताया कि करीब 20 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं सिंपोसियम हाई रिस्क प्रेगनेंसी की चपेट में हैं। जिसका प्रमुख कारण खान-पान में कमी है। गर्भवती महिलाओ में जागरूकता की कमी के कारण हाई रिस्क प्रेगनेंसी की मामले बढ़ते जा रहे है। जिससे जच्चा- बच्चा दोनों के जान का खतरा बना रहा है।

 डॉ. भारती ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 1000 में 285 गर्भवती महिलाएं सिंपोसियम हाई रिस्क प्रेगनेंसी के चपेट में है। मेटरनल मॉनिटिलिटी व इंटेंट मॉनिटिलिटी मापक यंत्र से हाई रिस्क प्रेगनेंसी के बारे में जाना जा सकता है। सही इलाज कर हाई रिस्क प्रेगनेंसी को कम कर सकते हैं।

 क्या है हाई रिस्क प्रेगनेंसी

. बार-बार समय से पहले बच्चे का गिर जाना

. गर्भवती महिलाओं में ब्लड प्रेशर ,मधुमेह, गुर्दा व हृदय रोग की समस्या होना

 . महिला का ब्लड ग्रुप आरएच निगेटिव होना

. गर्भावस्था में खून या पानी का रिसाव होना

 . गर्भवती महिला की उम्र 40 वर्ष से अधिक होना

 . बच्चे में जेनेटिक समस्या होना बचाव

. समय समय पर जांच कराएं

. रोजाना योगा और व्यायाम करें

. कैल्शियम और आयरन की दवाएं समय लें

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