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दिव्यांग बच्चों ने की मेट्रो में यात्रा, खुशी से खिले चेहरे
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दिव्यांग बच्चों ने की मेट्रो में यात्रा, खुशी से खिले चेहरे

दृष्टि संस्था के 18 दिव्यांग बच्चों के लिए सोमवार का दिन काफी खास रहा। इन बच्चों ने सोमवार को अपने कैम्पस से निकलकर मेट्रो में सैर की। मेट्रो के बारे में जाना। अहसास किया। मेट्रो में यात्रा की खुशी उनके चेहरों पर साफ झलक रही थी। जो देख नहीं सकते थे उन्हें उनके साथियों ने मेट्रो की खूबसूरती अपनी आंखों से दिखायी व बतायी। जो बच्चे सुन नहीं सकते थे उन्होंने देखकर मेट्रो का अहसास किया। मेट्रो के कर्मचारियों ने इन दिव्यांग बच्चों की यात्रा को यादगार बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्हें ट्रांसपोर्टनगर से चारबाग तक घुमाया। दृष्टि संस्था ने एलएमआरसी के सहयोग से सोमवार को दिव्यांग बच्चों को मेट्रो की सफर करायी। संस्था के 18 बच्चों के साथ उनके पांच शिक्षकों ने भी मेट्रो से भ्रमण किया। इनमें से कुछ बच्चे मानसिक मंदित तो कुछ सुनने बोलने में अस्मर्थ थे। नेत्रहीनों के लिए मेट्रो स्टेशन में विशेष पाथ बनाया गया है। इसके जरिए दृष्टिबाधित दिव्यांग आसानी से किसी भी स्टेशन पर उतर सकेंगे।

 बच्चों में दिखा मेट्रो देखने का उत्साह

दिव्यांग बच्चों में मेट्रो देखने का काफी उत्साह था। स्टेशन की चकाचौध देख वह काफी खुश थे। उनके जेहन में तमाम सवाल भी उठ रहे हथै। 12 साल की रोशनी सबसे आगे लाइन में खड़ी थी। वह न तो बोल पाती है और न सुन पाती है। बगल में खड़े मेट्रो कर्मचारी के वॉकीटॉकी पर अनाउंसमेंट हुई। दूसरी दिव्यांग बच्ची किरन उसको करीब से देखने की इच्छा जताई। कर्मचारी ने उसे वाकी टाकी पकड़ा दिया और वह हेलो बोलने लगी। 15 साल का रितेंद्र भी मेट्रो में बैठने को काफी उत्साहित थे। अपनी टीचर से पुछा कि ये क्या चीज है। अधिकारिओं ने उन्हें बताया कि इसे अच्छे परिवहन सुविधा के लिए बनाया गया है।

मेट्रो में दिव्यागों के लिए है सीट आरक्षित

एक बच्ची जो देख नहीं सकती है उसने जानना चाहा कि क्या उसके जैसे लोग मेट्रो में यात्रा कर सकते हैं। इस पर अधिकारियों ने बताया कि कोई भी मेट्रो का आसानी से इस्तेमाल कर सकता है। निदेशक महेन्द्र कुमार ने बताया कि हिंदी, अंग्रेजी में डिस्पले और अनाउंसमेंट के अलावा नेत्रहीन व्यक्तियों के लिए मेट्रो में ब्रेल भाषा का इस्तेमाल किया गया है। एक कोच में 16 सीटें दिव्यांगों के लिए आरक्षित हैं। इसमें ब्रेल भाषा में लिखा गया है ताकि नेत्रहीन इसे इसे छूकर जान सकें।

 

 

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