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प्रदूषण और गंदगी से प्रभावित  है गोमती नदी
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प्रदूषण और गंदगी से प्रभावित है गोमती नदी

सूबे की राजधानी लखनऊ में प्रवाहित हो रही गोमती नदी की हालत प्रदूषण के चलते दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। गोमती में नालों के जरिए रोजाना लाखों टन गंदगी , प्लास्टिक कचरा और माला-फूल फेंके जा रहे हैं। जिसके चलते नदी के प्रदूषण का लेबल लगतार बढ़ता जा रहा है। तमाम दावों के बावजूद सरकार अभी तक नदी को निर्मल करने के लिए किसी ठोस योजना पर काम करती नजर नहीं आ रही है।

 

गऊघाट से गोमती नदी राजधानी में प्रवेश करती है। वहां से लेकर जनपद पार करते करते गोमती में कुल 37 नाले गिरते हैं। इनमें से 8 नाले ऐसे हैं जो शहर के बाहर गोमती में गिरते हैं। हालांकि हाल-फिलहाल 9 नालों को समानांतर चैनल से जोड़ दिया गया है बावजूद 20 छोटे बड़े नाले रिवर फ्रंट में गिर रहे हैं। ट्रांस गोमती में अब भी 6 बड़े नाले नदी में कचरा उगल रहे हैं। यही नहीं घाटों और नदी तट पर कूड़े का अंबार लगा रहता है। यह कूड़ा बाद में नदी में गिरा दिया जाता है। सैकड़ों टन गोबर रोज गोमती के पानी में गिराया जा रहा है। नालों के पानी के साथ कई घातक केमिकल भी नदी में पहुंच रहे हैं। गोमती नदी के अधिकांश हिस्सों में जलकुंभी फैल गई है। इससे नदी का पानी सडऩे लगा है। यही नहीं गोमती रिवर फ्रंट घूमने आने वाले भी यहां लगातार गंदगी फैला रहे हैं। 

 7 किलोमीटर लंबा रिवरफ्रंट पूरी तरीके बदहाल हो चुका है। नदी के तट पर लगाए गए तमाम पौधे सूख चुके हैं। विदेशों से मंगा कर यहां घास लगाई गई थी, वह भी सूख चुकी है। नदी को साफ करने के लिए लगाई गई मशीनें भी बंद हो चुकी हैं। नाव के जरिए यहां सफाई की व्यवस्था थी, वह भी बंद हो चुकी है। लिहाजा गोमती का प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। यह स्थिति तब है जब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नदियों को अविरल और निर्मल रखने का निर्देश दे चुके है।

 

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